first atm machine in world to india
एटीएम मशीन का इतिहास: विश्व से भारत तक बैंकिंग क्रांति की कहानी
आज एटीएम केवल पैसे निकालने का साधन नहीं है, बल्कि बैंकिंग सेवाओं का प्रतीक बन चुका है। यह हमें समय की पाबंदी से मुक्त करता है और 24 घंटे बैंकिंग की सुविधा देता है। डिजिटल युग में जहाँ यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का बोलबाला है, वहीं एटीएम ने उस परिवर्तन की बुनियाद रखी थी।
1️⃣ विश्व में पहली एटीएम मशीन की शुरुआत
विश्व की पहली एटीएम मशीन 27 जून 1967 को ब्रिटेन के लंदन के एनफील्ड क्षेत्र में स्थित Barclays Bank में स्थापित की गई थी। इस मशीन के आविष्कार का श्रेय स्कॉटिश इंजीनियर John Shepherd-Barron को जाता है। शुरुआत में यह मशीन कार्ड की बजाय विशेष वाउचर के माध्यम से नकदी देती थी।
उस दौर में यह तकनीक किसी चमत्कार से कम नहीं थी। बैंकिंग सेवाएँ केवल निर्धारित समय तक ही उपलब्ध थीं, लेकिन एटीएम ने ग्राहकों को 24 घंटे नकदी प्राप्त करने की सुविधा दी। यही वह क्षण था जिसने आधुनिक बैंकिंग की दिशा बदल दी।

2️⃣ भारत में पहली एटीएम मशीन कब और कहाँ लगी?
भारत में पहली एटीएम मशीन वर्ष 1987 में मुंबई में लगाई गई थी। इसे HSBC बैंक ने स्थापित किया।
उस समय एटीएम का उपयोग सीमित ग्राहकों तक था, लेकिन धीरे-धीरे यह सुविधा आम जनता तक पहुँच गई। आज भारत में लाखों एटीएम मशीनें कार्यरत हैं, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।
3️⃣ एटीएम ने कैसे बदली बैंकिंग व्यवस्था?
एटीएम मशीन ने बैंकिंग को समय की सीमाओं से मुक्त कर दिया। पहले ग्राहकों को बैंक खुलने का इंतजार करना पड़ता था, लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। एटीएम आने के बाद यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई।
इसके अलावा एटीएम ने डिजिटल बैंकिंग की नींव रखी। आज हम नकदी निकासी के साथ-साथ बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट और कई अन्य सेवाएँ भी एटीएम के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को भी मजबूत करती है।
4️⃣ डिजिटल युग में एटीएम की भूमिका
आज के समय में यूपीआई और ऑनलाइन पेमेंट का चलन बढ़ गया है, लेकिन एटीएम की उपयोगिता अभी भी कम नहीं हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है, वहाँ एटीएम अभी भी प्रमुख नकदी स्रोत हैं।
एटीएम ने बैंकिंग को भरोसेमंद और सुलभ बनाया है। यह तकनीक हमें यह सिखाती है कि नवाचार का असली उद्देश्य आम लोगों की सुविधा बढ़ाना होता है।
5️⃣ तकनीक, विश्वास और सुविधा की यात्रा
एटीएम मशीन की कहानी केवल एक मशीन के आविष्कार की नहीं, बल्कि आधुनिक बैंकिंग क्रांति की कहानी है। 1967 में लंदन से शुरू हुई यह यात्रा 1987 में मुंबई पहुँची और आज पूरे भारत में फैल चुकी है।
एटीएम ने न केवल बैंकिंग को आसान बनाया, बल्कि आम नागरिक को आर्थिक रूप से सशक्त भी किया। भविष्य में चाहे डिजिटल भुगतान कितना भी आगे बढ़ जाए, एटीएम का महत्व हमेशा बना रहेगा।

BRIJESH MAURYA The Hind Manch के संस्थापक और लेखक हैं। लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से आने वाले बृजेश मौर्य सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर तथ्य आधारित लेख लिखते हैं। आप एक सक्रिय स्टॉक मार्केट ट्रेडर भी हैं और निवेश व अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर जागरूकता फैलाते हैं।