यम द्वितीया: परंपरा और महत्व

यम द्वितीया त्योहार :
त्योहार की शुरुआत कैसे हुई?:
संस्कृति में यम द्वितीया का स्थान:
पौराणिक कथा के अनुसार पर्व की शुरुआत :

एक दिन अचानक यमदेव अपने बहन यमुना से मिलने पहुंच गए वह दिन कार्तिक मास की द्वितीया तिथि Yam Dwitiya थी, बहन यमुना ने जब यह समाचार सुना भाई यम आए हैं तो वह बहुत प्रसन्न हुयी और अपने भाई यम का बहुत उत्साह के साथ आदर सत्कार किया, बहन यमुना के आदर सत्कार से यमदेव बहुत प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा तब यमुना ने कहा कि आज के दिन जो भाई अपने बहन के यहां जाकर अपने बहन से मिलेगा उसे कभी अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा, यमदेव ने अपनी बहन को यह वरदान देकर बहन का मान रखा, तब से यह त्यौहार Yam Dwitiya के नाम से जाना जाता हैं।
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उस समय उसपर अकाल मृत्यु का भय मंडरा रहा था, जब वह नदी के पास उसे पार करने के लिए पंहुचा तब मृत्यु नदी से आकर बोली मैं तुम्हारी मृत्यु हूँ और तुम्हारे प्राण लेने आयी हूँ, तब उस लड़के ने कहा, मैं अपने बहन से मिलने जा रहा हूँ जब वापस आऊंगा तब मेरे प्राण ले लेना मृत्यु मान गयी और वह नदीपार कर गया।
आगे जाने पर उसे सर्प के रूप में मृत्यु फिर मिली और अपनी बात दोहराई की मैं तुम्हारे प्राणों को लेने आयी हूँ, तब उस लड़के ने अपनी वही बात दोहराई सर्प मान गया, और आगे जाने पर उस लड़के को मृत्यु शेर के रूप में मिली, इसबार भी मृत्यु ने वही बात कही कि मैं तुम्हारे प्राणो को लेने आयी हूँ, तब उस बालक ने अपनी पुरानी बात दोहराई की मैं अपने बहन से मिलकर आ जाऊँ तब तुम मेरे प्राणों को ले लेना लड़के की बात को शेर भी मान गया।

और इस तरह वह लड़का अपनी मृत्यु से बचता हुआ बहन के घर के दरवाजे पर पहुंच गया बहन ने भाई का बहुत आदर सत्कार किया भाई, बहन के इस प्रेम से बहुत प्रसन्न हुआ लेकिन भाई गरीब था बहन को देने के लिए कुछ नहीं था ,तब बहन ने कहा भाई तू मुझसे छोटा है इसलिए कोई बात नहीं तुम मुझसे मिलने आये यही सबसे बड़ा उपहार है मेरे लिए।
कुछ दिन बहन के यहां रुकने के बाद एक दिन वह घर जाने के लिए तैयार हुआ, बहन ने भाई के लिए सुबह जल्दी से उठकर रास्ते में खाने के के लिए भोजन के साथ लड्डू भी बनाकर दिए और उन लड्डुओं से कुछ लड्डू अपने बच्चों के लिए भी बचा लिए भाई को विदा कर जब वह अपने बच्चों को लड्डू खिलानें के लिए देने लगी तब उसने देखा लड्डू का रंग नीला हो गया है। जब उसने सिल पर देखा जहाँ लड्डू के लिए चने की दाल पिसी थी तो वहां एक सर्प भी पड़ा था जो सुबह अँधेरे की वजह से दाल के साथ पिस गया था।
अब बहन डर गयी और उस रास्ते की तरफ दौड़ी जिधर उसका भाई जा रहा था उसने सोचा अगर लड्डू मेरा भाई खा लेगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। कुछ दूर जाने पर उसका भाई मिल गया और उसने भाई से लड्डू लेकर जमींन में गाढ़ दिया, तब भाई ने कहा, बहन तुम मुझे कब तक बचाओगी आगे मेरी मृत्यु के रूप में शेर, सर्प और नदी के रूप में इन्तजार कर रही है।
बहन कुछ देर सोच विचार करने के बाद भाई के साथ बाजार गयी वहां से सर्प के लिए दूध शेर के लिए मांस और नदी के लिए चुनरी लेकर भाई के साथ चलने लगी, जब शेर मिला और उसके भाई की तरफ दौड़ने लगा तब बहन ने मांस को शेर के आगे रख दिया शेर मांस खाने लगा और वो दोनों वहां से आगे चले गए, आगे जाने पर सर्प से मुलाकात हुई, सर्प डसने के लिए जैसे ही लड़के की तरफ दौड़ा बहन ने दूध का कटोरा उसके सामने रख दिया और सर्प दूध पीने लगा।
आगे जाने पर नदी को बहन ने चुनरी भेंट की और अपने भाई के प्राणों की रक्षा के लिए प्रार्थना किया। तब नदी भी मान गयी और इस तरह बहन ने अपने भाई के प्राणों की रक्षा की, तब से यह त्यौहार भाई दूज “Yam Dwitiya” के रूप में मनाया जाता हैं।
भाई दूज (Yam Dwitiya): 2023
साल 2023 में भाई दूज “Yam Dwitiya” का पर्व 14 और 15 नवंबर को मनाया जाएगा. पंचांग के मुताबिक, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 14 नवंबर को दोपहर 2:36 बजे से शुरू होकर 15 नवंबर को दोपहर 1:47 बजे तक है. उदया तिथि के कारण भाई दूज का त्योहार 15 नवंबर को मनाया जाना चाहिए.
भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है. इस दिन बहनें अपने भाई को नारियल देकर टीका करती हैं और मिठाई खिलाती हैं. भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है.
भाई दूज (Yam Dwitiya) पर तिलक करने के लिए इस साल दो शुभ मुहूर्त हैं:
Yam Dwitiya: पहला शुभ मुहूर्त 15 नवंबर को सुबह 6 बजकर 44 मिनट से सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक है.
भाई-बहन के बंधन का महत्व Yam Dwitiya:

Yam Dwitiya: भाई-बहन के सजीव बंधन का प्रेम अद्वितीय है। यह रिश्ता न केवल परिवार की स्थापना में मदद करता है, बल्कि यह दोनों के जीवन में एक अद्वितीय सांगतिकता भी प्रदान करता है। इस बंधन में छिपा हुआ एक विशेष प्रकार का प्यार होता है जो समृद्धि, समर्थन, और आत्मिक समृद्धि में मदद करता है।
Yam Dwitiya, जिसे भाई-बहन के बंधन के दिन का एक खास अवसर माना जाता है, भाई दूज पर्व यह दिखाता है कि यह रिश्ता सिर्फ फैमिली की मित्रता नहीं, बल्कि विश्वास, समर्थन, और साझा जीवन की एक नई प्रारंभिका है। इस दिन, भाई-बहन एक दूसरे के साथ विशेष रूप से बंधित होते हैं और एक दूसरे के प्रति अपने अद्वितीय आदर और स्नेह को मनाते हैं।
इस अद्वितीय बंधन के माध्यम से, भाई-बहन का प्यार Yam Dwitiya के समय अधिक बढ़ता है। इस दिन, भाई अपनी बहन के पैरों को छूकर उसका प्यार और स्नेह प्राप्त करता है, जबकि बहन भाई को आशीर्वाद और शुभकामनाएं देती है। इस दिन को भाई-बहन के बीच एक-दूसरे के साथ अधिक वक्त बिताने का एक अच्छा मौका मिलता है, जिससे रिश्ता मजबूत होता है और दोनों एक दूसरे की जरूरतों को समझ सकते हैं।
इस समृद्धि और समर्थन के साथ, भाई-बहन कई दिलचस्प बचपन के किस्सों और अनुभवों को साझा करते हैं।