मंगल महोत्सव: पर्यावरण अनुकूल बड़ा मंगल के लिए हुई महत्वपूर्ण बैठक संपन्न
बड़ा मंगल, आस्था और समर्पण का महापर्व, प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बाँधता है। लेकिन इस उत्सव के साथ अक्सर अनियंत्रित कचरा, प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन की चुनौती भी जुड़ जाती है। यह सोचकर कि धार्मिक आयोजन प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी से अलग नहीं हो सकते, इस वर्ष आगामी 5 मई से शुरू होने वाले बड़ा मंगल को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए एक ऐतिहासिक बैठक संपन्न हुई।
यह बैठक श्रीमती इंदु थापा जी के निवास, 36, शिव विहार कॉलोनी, विकास नगर, सेक्टर 5 – लखनऊ में आयोजित की गई। इस स्थानीय प्रयास ने समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प को मूर्त रूप दिया। बैठक में न केवल सामाजिक संगठनों ने भाग लिया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत संस्थाओं ने भी अपनी विशेष सहभागिता दर्ज कराई। इस पहल का मूल उद्देश्य है— “सलाह नहीं, सहयोग” के मंत्र के साथ बड़ा मंगल को स्वच्छ, हरित और संस्कारित बनाना। आइए, इस विस्तृत आलेख में जानते हैं कि कैसे एक छोटी सी चिड़िया की दृढ़ता और महाकुंभ के सफल प्रयोग की प्रेरणा से इस बार के मंगल महोत्सव की दिशा बदल सकती है, और कैसे आप भी इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।
🎯 बड़ा मंगल को पर्यावरण अनुकूल बनाने का संकल्प
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस वर्ष बड़ा मंगल के दौरान होने वाले आयोजनों में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाएगा। साथ ही, आयोजनों के बाद उत्पन्न होने वाले कचरे के निस्तारण के लिए एक व्यवस्थित योजना बनाई गई।
🧭 श्रीमान गोपाल आर्य जी का मार्गदर्शन

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पर्यावरण गतिविधि संयोजक श्रीमान गोपाल आर्य जी ने अपना मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने लखनऊ शहर के पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए विशेष उपाय सुझाए।
🍽️ बर्तन बैंक की स्थापना: डिस्पोजल से मुक्ति का समाधान
श्री गोपाल आर्य जी ने कहा कि बड़ा मंगल के दौरान भोजन और प्रसाद के बाद डिस्पोजल (प्लेट, गिलास) इधर-उधर फेंक दिए जाते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। इस समस्या के समाधान के लिए बर्तन बैंक की स्थापना की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
- स्थानीय लोगों को जागरूक किया जाए।
- स्कूलों और मंदिरों में जाकर बच्चों और नागरिकों को इस अभियान से जोड़ा जाए।
- प्रत्येक घर से कम से कम एक थाली, एक गिलास और एक थैला देने का आग्रह किया जाए।
🕊️ प्रेरक प्रसंग: चिड़िया और समुद्र की कहानी
श्री गोपाल आर्य जी ने एक प्रेरक कहानी के माध्यम से संकल्प की शक्ति समझाई:
एक छोटी चिड़िया ने समुद्र के किनारे अंडे दिए, लेकिन समुद्र की लहरें उन्हें बहा ले गईं। चिड़िया ने समुद्र से वापस मांगा, लेकिन समुद्र ने उसकी अनदेखी की। तब चिड़िया ने समुद्र का पानी चोंच से निकालकर गड्ढे में डालना शुरू कर दिया। दूसरी चिड़ियों ने उसका मजाक उड़ाया तो उसने कहा, “मुझे सलाह नहीं, सहयोग चाहिए।” यह बात गरुड़ देव तक पहुंची। गरुड़ देव ने भी सलाह देनी चाही, लेकिन चिड़िया ने सहयोग की मांग की। अंततः विष्णु जी के आशीर्वाद से समुद्र ने चिड़िया के अंडे वापस लौटा दिए।
सीख: यदि संकल्प सच्चा हो, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। सलाह देने से अधिक आवश्यक है सहयोग करना।
🏞️ महाकुंभ का सफल प्रयोग: एक थाली, एक गिलास, एक थैला
श्री गोपाल आर्य जी ने महाकुंभ के दौरान किए गए सफल प्रयोग का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां भी इसी प्रकार से “एक घर से एक थाली, एक गिलास और एक थैला” का आग्रह किया गया था। इस अभियान के तहत:
- 14 लाख थालियां, गिलास और थैलियां एकत्रित की गईं।
- इस पहल ने महाकुंभ को स्वच्छ और ग्रीन बनाने में अहम भूमिका निभाई।
🤝 सामूहिक सहभागिता का महत्व
बैठक में प्रवासी कार्यकर्ताओं ने सभी से पर्यावरण हित में कार्य करने की अपील की। इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद सहित अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठनों की भी सक्रिय सहभागिता रही।
🌿 हमारी पहल: क्या करें और क्या न करें?
| क्या करें (Do’s) | क्या न करें (Don’ts) |
|---|---|
| घर से स्टील की थाली और गिलास लेकर जाएं। | सिंगल यूज प्लास्टिक (डिस्पोजल) का उपयोग न करें। |
| कचरे को उचित स्थान पर डालें। | खाने-पीने की वस्तुएं इधर-उधर न फेंके। |
| बर्तन बैंक में सहयोग करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। | पॉलीथिन का उपयोग करने से बचें। |
| स्कूलों और मोहल्लों में जागरूकता फैलाएं। | आयोजन स्थलों पर गंदगी न फैलने दें। |
यह बैठक केवल एक आयोजन की तैयारी मात्र नहीं थी, बल्कि सामूहिक संकल्प और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक थी। यदि हम सभी मिलकर “सलाह नहीं, सहयोग” के मंत्र को अपनाएं, तो आने वाला बड़ा मंगल न केवल आस्था का महापर्व होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक आदर्श उदाहरण भी बनेगा।

BRIJESH MAURYA The Hind Manch के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। उन्हें कंटेंट राइटिंग में 8 वर्षों का अनुभव है। लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निवासी बृजेश सामाजिक और समसामयिक विषयों पर तथ्यपूर्ण एवं निष्पक्ष लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें यात्रा करना और किताबें पढ़ना विशेष रूप से पसंद है।