विश्व हिंदू परिषद अवध प्रांत की विभाग बैठक: संगठन, समर्पण और सामाजिक जागरण का संदेश
लखनऊ, 27 मार्च 2026। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अवध प्रांत की विभाग स्तरीय बैठक सुशांत गोल्फ सिटी स्थित सेलिब्रिटी गार्डन में संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन के केंद्रीय मंत्री देव भाई रावत जी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और हिंदू समाज के संगठन, एकता और कर्तव्य पथ पर अटल रहने के गहरे अर्थपूर्ण संदेश दिए।
बैठक में प्रांत अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रवाल, प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप जी, प्रांत उपाध्यक्ष ओमप्रकाश जी, प्रांत मंत्री देवेंद्र जी सहित उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आइए जानते हैं बैठक के प्रमुख बिंदुओं और देव भाई रावत जी के प्रेरणादायक उद्बोधन के बारे में।
संकल्प से सिद्धि तक: देव भाई रावत जी का उद्बोधन
बैठक को संबोधित करते हुए देव भाई रावत जी ने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य लेकर काम करने वाले व्यक्ति ही सफलता प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन की प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि हर कार्यकर्ता अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे।
स्थापना के चार स्तंभ
देव भाई रावत जी ने विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के ऐतिहासिक संदर्भ को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1964 में मुंबई के सांदीपनि मुनि आश्रम में साधु-संतों की उपस्थिति में विहिप की स्थापना हुई थी। उस समय संगठन के समक्ष मुख्यतः चार प्रमुख बिंदु रखे गए थे:
- हिंदू जीवन मूल्यों की पुनः स्थापना: हिंदू धर्म के जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना।
- सामाजिक कुरीतियों का निवारण: 1000 वर्षों के आक्रमण काल के दौरान उत्पन्न भ्रांतियों और कुरीतियों को दूर करना।
- घर वापसी: अपने भाइयों की घर वापसी (गृह वापसी) करवाना।
- समाज जागरण: हिंदू समाज में व्यापक जागरण लाना।
‘मेंढक’ की कहानी: हिंदू समाज को बदलना होगा अपना स्वभाव
अपने उद्बोधन में देव भाई रावत ने एक बेहद रोचक और गंभीर उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह मेंढक कभी इकट्ठा नहीं होते, उसी प्रकार हिंदुओं का स्वभाव भी अलग-थलग रहने का है। हिंदू समाज केवल मृत्यु के समय ही चार लोगों को इकट्ठा कर पाता है।
उन्होंने एक भारतीय युवक की कहानी सुनाई जो विदेश से पैसा कमाकर वापस लौटा और मेंढक पालने का काम करता था। यह युवक जिंदा मेंढकों को बिना ढक्कन बंद किए डिब्बे में भेजता था, फिर भी एक भी मेंढक बाहर नहीं निकलता था। अंग्रेजों को यह देखकर आश्चर्य हुआ तो युवक ने उत्तर दिया:
“मेंढक में मेरे हिंदू समाज का स्वभाव है – एक उछलता है तो दूसरा खींच लेता है।”
देव भाई रावत ने कहा कि हिंदू समाज को यह स्वभाव बदलना होगा। संगठन की भावना में कमी के कारण ही देश गुलाम हुआ था। उन्होंने कहा कि संगठन के तीन प्रमुख तरीके हैं – बैठक करें, प्रवास करें और लोगों से संपर्क करें। आज आवश्यकता है कि हिंदू समाज को जागृत करते हुए उसे एकजुट किया जाए।

‘पैर में चक्कर, मुंह में शक्कर’: कार्यकर्ता के चार गुण
देव भाई रावत ने कार्यकर्ताओं को चार गुणों के माध्यम से कार्य करने का मंत्र दिया:
- पैर में चक्कर: संगठन के लिए निरंतर दौड़-धूप करनी चाहिए, प्रयासरत रहना चाहिए।
- मुंह में शक्कर: रास्ते में बहुत से लोग मना करेंगे, बुरा कहेंगे, लेकिन आपके मुंह से मीठी बात ही निकलनी चाहिए।
- शीत ठंडाकार: किसी भी परिस्थिति में उत्तेजित नहीं होना है, सिर ठंडा रखकर धैर्य बनाए रखना है।
- हृदय में अंगार: अपने लक्ष्य के प्रति हृदय में जोश और अंगार बनाकर रखना है।
चिड़िया और आग की कहानी: प्रयास ही पूजा है
उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के लिए एक और प्रेरणादायक कहानी सुनाई। जंगल में आग लगने पर सभी जानवर भाग रहे थे, लेकिन एक छोटी चिड़िया ने अपनी चोंच में दो बूंद पानी लाकर आग पर डालने का प्रयास शुरू कर दिया।
पक्षीराज गरुड़ ने उसका मजाक उड़ाया, लेकिन चिड़िया ने कहा कि वह अपने घर को नहीं छोड़ सकती। चिड़िया की इसी दृढ़ता और प्रयास से प्रेरित होकर गरुड़ के झुंड सहित अन्य पशु-पक्षी भी प्रयास में जुट गए और अंततः आग बुझ गई। जब शेर ने सबको सम्मानित करना चाहा तो गरुड़ ने कहा कि सम्मान की पात्र वह छोटी चिड़िया है जिसने सबका आत्मविश्वास जगाया।
देव भाई रावत ने कहा कि संगठन का छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी महत्वपूर्ण है। उसे अपने कर्तव्य के प्रति दृढ़ रहना चाहिए। अच्छे कार्यकर्ता का व्यवहार ही अच्छे संगठन की पहचान होती है।
विश्व हिंदू परिषद: व्यापक और सर्वस्पर्शी प्रयास
देव भाई रावत ने स्पष्ट किया कि विश्व हिंदू परिषद का कार्य सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन का लक्ष्य सभी के कल्याण की कामना करने वाला होना चाहिए। विहिप केवल एक संगठन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति निर्माण की संस्था है।
वर्तमान में विहिप देशभर में 4,500 से अधिक सेवा परियोजनाएं चला रहा है, जिसमें संस्कार स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्वरोजगार केंद्र और अनाथालय शामिल हैं। इसके साथ ही, गौ रक्षा और संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए भी संगठन निरंतर कार्य कर रहा है।
आगे का मार्ग: हिचिंतक अभियान और युवा जुड़ाव
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कैसे संगठन को और अधिक सशक्त बनाया जाए। पिछले वर्षों में विहिप ने देशभर में 69 लाख हिचिंतक (शुभचिंतक) बनाने का लक्ष्य हासिल किया था। इसी कड़ी में बजरंग दल के विस्तार और मातृशक्ति को सक्रिय करने पर भी जोर दिया गया।
विहिप युवाओं को जोड़ने के लिए ऑनलाइन अभियान भी चला रहा है, ताकि 15-35 वर्ष के युवाओं को संगठन से जोड़ा जा सके। देव भाई रावत के उद्बोधन ने स्पष्ट कर दिया कि व्यक्तिगत प्रयास और सामूहिक एकता ही वह मार्ग है, जिससे सनातन की रक्षा और समाज का कल्याण संभव है।
27 मार्च 2026 को लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी स्थित सेलिब्रिटी गार्डन में हुई यह बैठक केवल एक संगठनात्मक समीक्षा मात्र नहीं थी, बल्कि यह हर कार्यकर्ता के लिए एक प्रेरणा स्रोत थी। देव भाई रावत जी के उदाहरणों ने यह संदेश दिया कि यदि हर व्यक्ति अपने कर्तव्य का पालन दृढ़ता और मीठे व्यवहार के साथ करे, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

BRIJESH MAURYA The Hind Manch के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। उन्हें कंटेंट राइटिंग में 8 वर्षों का अनुभव है। लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निवासी बृजेश सामाजिक और समसामयिक विषयों पर तथ्यपूर्ण एवं निष्पक्ष लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें यात्रा करना और किताबें पढ़ना विशेष रूप से पसंद है।