Skip to content
THE HIND MANCH

निष्पक्ष खबर सटीक विश्लेषण

THE HIND MANCH

निष्पक्ष खबर सटीक विश्लेषण

  • MENU
    • Stock Market
    • International News
    • STATE NEWS
      • Unnao
  • About us
  • MENU
    • Stock Market
    • International News
    • STATE NEWS
      • Unnao
  • About us
Close

Search

Subscribe
THE HIND MANCH

निष्पक्ष खबर सटीक विश्लेषण

THE HIND MANCH

निष्पक्ष खबर सटीक विश्लेषण

  • MENU
    • Stock Market
    • International News
    • STATE NEWS
      • Unnao
  • About us
  • MENU
    • Stock Market
    • International News
    • STATE NEWS
      • Unnao
  • About us
Close

Search

Subscribe
Latest News
February 23, 2026
सोहनलाल श्रीमाली के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग आयोग: जानें उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य की राह –
February 23, 2026
जानें मनुष्य की उत्पत्ति कब हुई?
वंदे-मातरम्-चौक
February 21, 2026
Vande Mataram Chowk
UGC NEW RULES
February 21, 2026
UGC New Rules 2026
पेंशन
February 20, 2026
Sri Lanka scraps MPs’ pensions
February 20, 2026
Today Open Gaudium IVF IPO
bees-attacke
February 20, 2026
Umpire dies after being attacked by bees in Unnao
एटीएम मशीन
February 20, 2026
 first atm machine in world to india
Stock market
February 19, 2026
IPO Investment:
Knowledge

जानें मनुष्य की उत्पत्ति कब हुई?

By BRIJESH MAURYA
February 23, 2026 9 Min Read

मनुष्य की उत्पत्ति कब हुई? विकास की 7 करोड़ साल की अनकही यात्रा

क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर हम इंसान, यानी होमो सेपियन्स, इस विशाल ब्रह्मांड में कब और कहाँ प्रकट हुए? यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों, दार्शनिकों और आम इंसानों के मन में जिज्ञासा का केंद्र रहा है। पौराणिक कथाओं में हमें सृष्टि की कई रोचक कहानियाँ मिलती हैं, लेकिन विज्ञान इस गूढ़ रहस्य को सुलझाने के लिए जीवाश्मों (Fossils), डीएनए साक्ष्यों (DNA evidence) और अथक खोजों के सहारे लगातार प्रयासरत है।

इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको ले चलेंगे एक ऐसी रोमांचक यात्रा पर, जो करोड़ों साल पहले शुरू हुई और आज के आधुनिक मनुष्य तक आकर जाकर खत्म होती है। हम जानेंगे कि मानव विकास (Human Evolution) की वह लंबी प्रक्रिया क्या थी, जिसने हमें वह बनाया जो आज हम हैं। साथ ही, इस यात्रा में हम उन महत्वपूर्ण भारतीय पुस्तकों पर भी प्रकाश डालेंगे जिन्होंने इस विषय को समझने में हमारी मदद की है।

मनुष्य की उत्पत्ति: एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Origin of Humans: A Scientific Perspective)

19वीं सदी से पहले तक यह माना जाता था कि मनुष्य को किसी दैवीय शक्ति ने रचा है। लेकिन 1859 में चार्ल्स डार्विन (Charles Darwin) ने अपनी क्रांतिकारी पुस्तक “ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़” प्रकाशित की, जिसमें जीवों के विकासवाद (Evolution) का सिद्धांत दिया गया। बाद में 1871 में डार्विन ने “द डिसेंट ऑफ मैन” में स्पष्ट किया कि मनुष्य की उत्पत्ति किसी विलुप्त हो चुके वानर (Ape) से हुई है और हमारे पूर्वज आधुनिक वानरों (जैसे चिंपैंजी और गोरिल्ला) के साथ एक ही परिवार से जुड़े हैं।

आज यह सिद्धांत जीवाश्म विज्ञान (Paleontology), आनुवंशिकी (Genetics) और पुरातत्व (Archeology) से मिले प्रमाणों के आधार पर पूरी तरह स्थापित हो चुका है। आइए, इस यात्रा को एक टाइमलाइन के जरिए समझते हैं।

मानव विकास की समयरेखा (Timeline of Human Evolution)

मानव विकास की कहानी लाखों सालों में फैली एक जटिल और रोमांचक गाथा है। यहाँ हम मुख्य पड़ावों को विस्तार से देखेंगे।

1. शुरुआती पूर्वज (6-10 लाख साल पहले): होमिनिन्स (Hominins) का उदय

आनुवंशिक साक्ष्य बताते हैं कि मनुष्य और आधुनिक चिंपैंजी के वंश करीब 6 से 9 लाख साल पहले अफ्रीका में एक-दूसरे से अलग हुए। इसके बाद जो प्रजातियाँ आईं, उन्हें होमिनिन्स कहा गया, जो सीधे चलने (Bipedalism) जैसे गुणों के लिए जानी जाती हैं।

इस काल की कुछ महत्वपूर्ण प्रजातियाँ इस प्रकार हैं:

· साहेलान्थ्रोपस त्चाडेन्सिस (Sahelanthropus tchadensis): लगभग 7 लाख साल पहले। यह अब तक खोजी गई सबसे पुरानी मानव-पूर्वज प्रजातियों में से एक है।
· आर्डिपिथीकस (Ardipithecus): लगभग 5.8 से 4.4 लाख साल पहले। प्रसिद्ध जीवाश्म ‘अर्डी’ (Ardi) इसी प्रजाति की है। यह पेड़ों पर भी रहता था और दो पैरों पर चलना शुरू कर चुका था।

2. ऑस्ट्रेलोपिथीकस (Australopithecus) का युग (4-2 लाख साल पहले)

इस काल की सबसे प्रसिद्ध प्रजाति ऑस्ट्रेलोपिथीकस (Australopithecus) है। ये सीधे चलने वाले प्राइमेट थे, लेकिन इनका दिमाग आज के मनुष्यों की तुलना में काफी छोटा था। सबसे प्रसिद्ध जीवाश्म ‘लूसी’ (Lucy) नामक एक महिला का है, जो ऑस्ट्रेलोपिथीकस अफ़रेन्सिस (Australopithecus afarensis) प्रजाति से थी और लगभग 3.2 लाख साल पहले इथोपिया (Ethiopia) में रहती थी।

3. होमो हैबिलिस (Homo habilis): पहला इंसान? (लगभग 2.8 – 1.5 लाख साल पहले)

लगभग 2.8 लाख साल पहले, होमो (Homo) वंश का उदय हुआ। होमो हैबिलिस (Homo habilis) या ‘हैंडी मैन’ सबसे पहली प्रजाति थी, जिसने पत्थर के औजार (Stone Tools) बनाने शुरू किए। यही कारण है कि इसे होमो जीनस (Genus) में रखा गया।

4. होमो इरेक्टस (Homo erectus): अफ्रीका से बाहर कदम (लगभग 1.9 लाख – 1,10,000 साल पहले)

होमो इरेक्टस (Homo erectus) मानव विकास की यात्रा में एक मील का पत्थर है। ये पहली प्रजाति थी जिसने शरीर का आकार आधुनिक मनुष्यों जैसा विकसित किया और आग पर काबू पाना सीखा। सबसे महत्वपूर्ण बात, यह पहली मानव प्रजाति थी जिसने अफ्रीका से बाहर निकलकर यूरोप और एशिया में फैलाव किया, लगभग 1.8 लाख साल पहले।

आधुनिक मनुष्य (होमो सेपियन्स) का उदय (Emergence of Homo Sapiens)

अब हम अपने मुख्य प्रश्न पर आते हैं: आखिर हम, होमो सेपियन्स (Homo Sapiens) का उदय कब हुआ?

सबसे पुराने जीवाश्म (The Oldest Fossils) – 3,00,000 साल पहले

लंबे समय तक माना जाता रहा कि आधुनिक मनुष्य करीब 2 लाख साल पहले अस्तित्व में आया, लेकिन हालिया खोजों ने इस समय को और पीछे खींच दिया है।

· जेबेल इरहौद (Jebel Irhoud), मोरक्को: 2017 में यहाँ से मिले 3,00,000 साल पुराने जीवाश्मों ने वैज्ञानिक जगत को चौंका दिया। इनमें आधुनिक और आदिम दोनों तरह की विशेषताएं मिलती हैं, जो दर्शाती हैं कि हमारी प्रजाति का उदय पूरे अफ्रीका में फैली एक जटिल प्रक्रिया थी, न कि किसी एक स्थान पर।
· ओमो किबिश (Omo Kibish), इथोपिया: यहाँ से लगभग 2,00,000 साल पुराने जीवाश्म मिले हैं, जो निश्चित रूप से आधुनिक मनुष्यों की तरह दिखते हैं।

पैन-अफ्रीकन मॉडल (The Pan-African Model) क्या है?

अब वैज्ञानिक मानते हैं कि होमो सेपियन्स का जन्म एक ही स्थान पर नहीं, बल्कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में फैली अलग-अलग आबादियों से हुआ। ये समूह हजारों सालों तक अलग-थलग रहे, अपनी खासियतें विकसित कीं, और फिर जलवायु परिवर्तन के कारण जब ये समूह फिर से मिले, तो उनके बीच जीन का आदान-प्रदान हुआ। इस प्रक्रिया ने मिलकर आज के होमो सेपियन्स को जन्म दिया।

हम अकेले नहीं थे: अन्य मानव प्रजातियाँ (Other Human Species)

होमो सेपियन्स का इतिहास कोई सीधी रेखा नहीं है, बल्कि एक पेड़ की शाखाओं की तरह है। जब हमारे पूर्वज अफ्रीका में विकसित हो रहे थे, तब दुनिया के दूसरे हिस्सों में मनुष्यों की अन्य प्रजातियाँ रह रही थीं।

· नींडरथल (Neanderthals): यूरोप और पश्चिमी एशिया में रहने वाले ये मजबूत इंसान हमारे सबसे करीबी रिश्तेदार थे। ये लगभग 4,00,000 से 40,000 साल पहले तक अस्तित्व में रहे और कुछ समय के लिए होमो सेपियन्स के साथ सह-अस्तित्व (Co-existence) में भी रहे।
· डेनिसोवन (Denisovans): इनके बारे में बहुत कम जानकारी है क्योंकि इनके केवल कुछ ही जीवाश्म साइबेरिया (Siberia) की एक गुफा में मिले हैं। आनुवंशिक अध्ययन बताते हैं कि ये भी हमारे समकालीन थे।
· होमो फ्लोरेसिएन्सिस (Homo floresiensis): ‘हॉबिट’ (Hobbit) के नाम से मशहूर यह प्रजाति इंडोनेशिया के फ्लोरेस द्वीप पर रहती थी और अपने छोटे कद के लिए जानी जाती है।

आनुवंशिक सबूत बताते हैं कि होमो सेपियन्स ने जब अफ्रीका से बाहर निकलकर दुनिया भर में फैलना शुरू किया, तो इनमें से कुछ प्रजातियों, जैसे नींडरथल और डेनिसोवन, के साथ अंतर्जनन (Interbreeding) भी हुआ। यही कारण है कि आज अफ्रीकी मूल के बाहर के लोगों के डीएनए में नींडरथल का एक छोटा सा हिस्सा (लगभग 2%) मौजूद है।

अफ्रीका से बाहर का सफर (Migration Out of Africa)

होमो सेपियन्स का अफ्रीका से बाहर का सफर एक बार में नहीं हुआ, बल्कि कई चरणों में हुआ।

· शुरुआती प्रवास: इजराइल (Israel) की मिसलिया गुफा (Misliya Cave) से मिले 1,80,000 साल पुराने जबड़े के जीवाश्म से पता चलता है कि हमारे पूर्वज बहुत पहले ही अफ्रीका से बाहर निकलने की कोशिश कर चुके थे।
· बड़ा प्रवास: लगभग 50,000 से 60,000 साल पहले होमो सेपियन्स का एक बड़ा समूह अफ्रीका से बाहर निकला और यूरोप, एशिया और अंततः ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में फैल गया। आज दुनिया में मौजूद ज्यादातर गैर-अफ्रीकी लोगों के पूर्वज इसी समूह से हैं।

भारतीय परिप्रेक्ष्य: मानव विकास पर महत्वपूर्ण पुस्तकें (Indian Perspective: Important Books on Human Evolution)

मानव उत्पत्ति के अध्ययन में भारत का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यहाँ कई विद्वानों ने इस विषय पर गहन शोध किया और महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन किया। इन पुस्तकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लेकर आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य तक, विभिन्न आयामों को समाहित किया गया है।

वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक दृष्टिकोण (Scientific & Archaeological Approach)

· “Story of Evolution” (Second Revised Edition) by Govind Bhattacharjee: यह पुस्तक ‘क्वेस्ट फॉर ओरिजिन’ श्रृंखला का दूसरा खंड है। डॉ. गोविंद भट्टाचार्जी द्वारा लिखित यह पुस्तक पृथ्वी पर जीवन के असाधारण विकास और होमो सेपियन्स तक की यात्रा का वर्णन करती है। लेखक ने इसे बेहद रोचक और वैज्ञानिक दृष्टि से सटीक बनाने का प्रयास किया है, जो आम पाठक और शोधार्थी दोनों के लिए उपयोगी है ।
· “Anthropological and Archaeological Research and Development” edited by S. Narayan: यह पुस्तक मानव विज्ञान और पुरातत्व के क्षेत्र में भारतीय शोध को एक व्यापक मंच प्रदान करती है। इसमें होमो सेपियन्स की उत्पत्ति और विकास, आनुवंशिकी, भाषा विज्ञान और सांस्कृतिक विकास जैसे विषयों पर अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के लेख शामिल हैं ।
· “A million years of hominin sociality and cognition: Acheulean bifaces in the Hunsgi-Baichbal Valley, India” by Ceri Shipton: यह एक विशेष शोध पुस्तक है जो भारत के हुन्सगी-बैचबल घाटी (कर्नाटक) में मिले अचेलियन पत्थर के औजारों के अध्ययन पर आधारित है। यह पुस्तक प्रारंभिक मानव प्रजातियों (होमिनिन) के सामाजिक व्यवहार और संज्ञानात्मक क्षमताओं को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती है ।
· “Human Evolution and its Uniqueness” by Chandalada V. Rao: यह पुस्तक मानव विकास की उस अनूठी यात्रा की पड़ताल करती है जिसने हमें अन्य प्रजातियों से अलग किया। लेखक ने वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर मानव की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विशिष्टता को समझाने का प्रयास किया है ।
· “मानव की उत्पत्तियाँ (Manav ki uttpattiyan)” by John Butner-Janush (हिंदी अनुवाद): यह पुस्तक मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई थी और इसका हिंदी अनुवाद उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा प्रकाशित किया गया। यह मानव के इतिहास, उसकी संस्कृति और समाजशास्त्रीय पहलुओं पर केंद्रित है, जिससे हिंदी भाषी पाठक भी इस विषय को गहराई से समझ सकें .

आध्यात्मिक एवं दार्शनिक दृष्टिकोण (Spiritual & Philosophical Approach)

· “Human Species and Beyond” by Rajesh K. Singh: यह पुस्तक विज्ञान और अध्यात्म के बीच की खाई को पाटने का एक साहसिक प्रयास है। लेखक राजेश सिंह ने हिंदू शास्त्रों (उपनिषद, वेद) और बाइबिल के संदेशों को आधुनिक वैज्ञानिक खोजों (क्वांटम भौतिकी, आनुवंशिकी) से जोड़कर मानव प्रजाति के विकास और उसके भविष्य पर विचार किया है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो वैज्ञानिक तथ्यों के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना के विकास में रुचि रखते हैं .
· “The Human Evolution in The Physical” by Amarakavi Ramachandra: यह पुस्तक सिद्ध परंपरा और योग के दृष्टिकोण से मानव विकास की व्याख्या करती है। लेखक अमरकवि रामचंद्र, जो एक ब्रह्मज्ञानी और सिद्ध हैं, ने ‘इंटीग्रल योग’ के माध्यम से मानव शरीर, चेतना और ब्रह्मांड के बीच के संबंध को स्पष्ट किया है। पुस्तक में वेदों और उपनिषदों में वर्णित उन रहस्यमयी कड़ियों को उजागर किया गया है, जिन्हें समय के साथ भुला दिया गया .

ऐतिहासिक भारतीय खोजों का दस्तावेजीकरण (Documentation of Indian Discoveries)

· “Discovery of Early Man from the Narmada Valley” by Dr. Arun Sonakia: यह पुस्तक भारतीय पुरातत्व के इतिहास में एक मील का पत्थर है। डॉ. अरुण सोनकिया, जो भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) से जुड़े थे, ने 1982 में नर्मदा घाटी के हथनोरा (मध्य प्रदेश) से एक मानव जीवाश्म खोपड़ी की खोज की थी। यह खोपड़ी ‘नर्मदा होमिनिड’ के नाम से प्रसिद्ध है और इसे होमो इरेक्टस नर्मदेंसिस नाम दिया गया। यह खोज एशिया में चीन के बाहर अपनी तरह की पहली खोज थी। डॉ. सोनकिया की यह पुस्तक इस ऐतिहासिक खोज की पूरी कहानी बताती है, जिसमें जीवाश्म को निकालने की पेचीदा प्रक्रिया, उसका वैज्ञानिक अध्ययन और उस समय के वातावरण एवं उपकरणों का विवरण शामिल है। यह पुस्तक भारत में मानव विकास के अध्ययन के लिए एक अनिवार्य स्रोत है .

प्रारंभिक भारतीय प्रयास (Early Indian Endeavors)

· “पुरातत्त्व-निबंधावली (Purātattva-nibandhāvalī)” by Mahapandit Rahul Sankrityayan: यह हिंदी में लिखी गई एक ऐतिहासिक पुस्तक है, जो 1937 में प्रकाशित हुई थी। महापंडित राहुल सांकृत्यायन, जो एक प्रसिद्ध विद्वान और यात्री थे, ने इस पुस्तक में पुरातात्विक खोजों के आधार पर मानव विकास पर अपने विचार प्रस्तुत किए। यह पुस्तक इस विषय पर हिंदी में लिखी गई शुरुआती महत्वपूर्ण कृतियों में से एक मानी जाती है .

निष्कर्ष (Conclusion)

तो, आखिर मनुष्य की उत्पत्ति कब हुई? इसका जवाब है: हमारी प्रजाति होमो सेपियन्स का उदय लगभग 3,00,000 साल पहले अफ्रीका में हुआ था। लेकिन यह एक जटिल प्रक्रिया थी, जिसकी जड़ें लाखों साल पुराने उन वानरों (Apes) में हैं, जिन्होंने पहली बार दो पैरों पर चलना सीखा।

यह यात्रा केवल जीवाश्मों और तारीखों की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारी जिज्ञासा, अनुकूलन क्षमता और अस्तित्व की अदम्य भावना की गाथा है। नई तकनीक और भविष्य में मिलने वाले नए सबूत इस कहानी में और भी रोमांचक अध्याय जोड़ सकते हैं। और भारतीय विद्वानों द्वारा लिखित पुस्तकें इस वैश्विक कथा में हमारे देश के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

1. क्या मनुष्य बंदरों (Monkeys) से विकसित हुआ है?
   नहीं, यह एक आम गलतफहमी है। मनुष्य और आधुनिक वानरों (जैसे चिंपैंजी) के पूर्वज एक ही थे। करीब 6-7 लाख साल पहले यह वंश अलग-अलग दिशाओं में बँट गया। आज के बंदर और वानर हमारे चचेरे भाई (Cousins) हैं, पूर्वज नहीं।
2. मनुष्यों की सबसे पहली प्रजाति कौन सी थी?
   होमो जीनस (Human Genus) की सबसे पहली प्रजाति होमो हैबिलिस को माना जाता है, जिसने औजार बनाना सीखा। लेकिन इससे पहले भी ऑस्ट्रेलोपिथीकस जैसी कई प्रजातियाँ थीं, जो हमारे पूर्वज थीं और सीधी चलती थीं।
3. क्या डायनासोर (Dinosaurs) और मनुष्य एक ही समय में रहते थे?
   बिल्कुल नहीं। डायनासोर करीब 6.5 करोड़ साल पहले विलुप्त हो गए थे, जबकि मानव-पूर्वजों (Hominins) का उदय केवल 6-7 लाख साल पहले हुआ था। दोनों के बीच करोड़ों साल का अंतर है।
4. भारत में मानव विकास के सबसे पुराने प्रमाण कहाँ मिले हैं?
   भारत में मानव उपस्थिति के सबसे पुराने प्रमाणों में से एक ‘नर्मदा होमिनिड’ है, जो मध्य प्रदेश के हथनोरा से मिला था। इसे लगभग 2,50,000 से 7,00,000 साल पुराना माना जाता है और यह होमो इरेक्टस प्रजाति से संबंधित है .
5. क्या कोई हिंदी पुस्तक है जो मानव विकास पर आधारित हो?
   हाँ, कई हिंदी पुस्तकें उपलब्ध हैं। महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा लिखित “पुरातत्त्व-निबंधावली” (1937) इस विषय पर एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण हिंदी पुस्तक है . इसके अलावा, “मानव की उत्पत्तियाँ” जैसे अनुवादित कार्य भी उपलब्ध हैं .

BRIJESH MAURYA
BRIJESH MAURYA

BRIJESH MAURYA The Hind Manch के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। उन्हें कंटेंट राइटिंग में 8 वर्षों का अनुभव है। लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निवासी बृजेश सामाजिक और समसामयिक विषयों पर तथ्यपूर्ण एवं निष्पक्ष लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें यात्रा करना और किताबें पढ़ना विशेष रूप से पसंद है।

Tags:

पृथ्वी पर मनुष्य कब आयामानव अवतार कब हुआमानव उत्पत्ति का इतिहासमानव विकास की समयरेखाहोमो सेपियन्स का विकास
Author

BRIJESH MAURYA

BRIJESH MAURYA The Hind Manch के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। उन्हें कंटेंट राइटिंग में 8 वर्षों का अनुभव है। लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निवासी बृजेश सामाजिक और समसामयिक विषयों पर तथ्यपूर्ण एवं निष्पक्ष लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्हें यात्रा करना और किताबें पढ़ना विशेष रूप से पसंद है।

Follow Me
Other Articles
वंदे-मातरम्-चौक
Previous

Vande Mataram Chowk

Next

सोहनलाल श्रीमाली के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग आयोग: जानें उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य की राह –

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • सोहनलाल श्रीमाली के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग आयोग: जानें उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य की राह –
  • जानें मनुष्य की उत्पत्ति कब हुई?
  • Vande Mataram Chowk
  • UGC New Rules 2026
  • Sri Lanka scraps MPs’ pensions

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • February 2026

Categories

  • International News
  • Knowledge
  • LUCKNOW
  • NATIONAL NEWS
  • STATE NEWS
  • Stock market
  • Unnao
Copyright 2026 — All rights reserved. THE HIND MANCH