Sri Lanka scraps MPs’ pensions
श्रीलंका में सांसदों की पेंशन खत्म: बड़ा राजनीतिक फैसला और क्या होंगे इसके दूरगामी प्रभाव :
श्रीलंका में सांसदों की पेंशन व्यवस्था क्यों बनी थी मुद्दा?
हाल ही में श्रीलंका की संसद ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सांसदों की पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर दिया। फरवरी 2026 में पारित Parliamentary Pensions (Repeal) Act, No. 5 of 2026 के माध्यम से लगभग 49 वर्ष पुराना कानून रद्द कर दिया गया। यह फैसला देश में चल रहे आर्थिक सुधारों और सरकारी खर्च में कटौती की नीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से गुज़रा है। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी, महंगाई और जनता के विरोध प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बनाया। ऐसे माहौल में सांसदों की आजीवन पेंशन को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा था।

सांसदों की पेंशन व्यवस्था खत्म होने का क्या मतलब है?
अब पूर्व सांसदों को नहीं मिलेगी पेंशन
नए कानून के अनुसार:
• भविष्य में किसी भी सांसद को कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन नहीं मिलेगी।
• जो पूर्व सांसद पहले से पेंशन प्राप्त कर रहे थे, उनकी पेंशन भी बंद कर दी जाएगी।
• सांसदों की विधवाओं को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन भी समाप्त कर दी गई है।
यह निर्णय राजनीतिक वर्ग को मिलने वाली विशेष सुविधाओं में कटौती का संकेत देता है। सरकार का तर्क है कि जब आम जनता आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही है, तो जनप्रतिनिधियों को विशेष लाभ देना उचित नहीं है।
आर्थिक सुधार और जनभावना का प्रभाव
क्या यह फैसला आर्थिक संकट का परिणाम है?
श्रीलंका में 2022 के आर्थिक संकट के बाद सरकार पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और जनता दोनों का दबाव था कि वह अनावश्यक खर्च कम करे। सांसदों की पेंशन समाप्त करना उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी बजट पर बहुत बड़ा वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन यह एक प्रतीकात्मक और नैतिक कदम जरूर है। इससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह खुद पर भी सख्ती लागू कर रही है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
क्या अन्य देशों पर पड़ेगा असर?
श्रीलंका का यह निर्णय दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है। कई देशों में सांसदों और विधायकों को सेवा समाप्ति के बाद पेंशन मिलती है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या अन्य देश भी ऐसी व्यवस्था की समीक्षा करेंगे?
श्रीलंका में इस फैसले का स्वागत जनता के एक बड़े वर्ग ने किया है। सोशल मीडिया और नागरिक समूहों ने इसे “जनता के साथ न्याय” बताया है। वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय भी कहा है।
क्या यह सही दिशा में कदम है?
श्रीलंका में सांसदों की पेंशन खत्म करना केवल एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। यह निर्णय पारदर्शिता, जवाबदेही और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार अन्य आर्थिक सुधारों को कितनी मजबूती से लागू करती है।

BRIJESH MAURYA The Hind Manch के संस्थापक और लेखक हैं। लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से आने वाले बृजेश मौर्य सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर तथ्य आधारित लेख लिखते हैं। आप एक सक्रिय स्टॉक मार्केट ट्रेडर भी हैं और निवेश व अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर जागरूकता फैलाते हैं।