पहलगाम हमले पर जो लोग चुप थे, आज खामनेई की मौत पर सड़कों पर उतर आए हैं।
पहलगाम से तेहरान तक: दोहरे मापदंड और हमारी सामूहिक संवेदना का सवाल “संवेदना” शब्द सुनते ही मन में ममता, करुणा और इंसानियत की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या हो जब यह संवेदना भी चुनिंदा लोगों, चुनिंदा घटनाओं और चुनिंदा भूगोल के लिए ही सुरक्षित रह…
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