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ट्रेडिंग-का-सबसे-बड़ा-दुश्मन.

शेयर बाज़ार में कदम रखते ही हर किसी के मन में सिर्फ़ एक ख्वाहिश होती है – ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाना। लेकिन यही ख्वाहिश जब लालच का रूप ले लेती है, तो वही सफलता की सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है। असल में, ट्रेडिंग में असफलता का कारण ज्ञान या तकनीक की कमी से ज़्यादा, लालच और अधीरता होती है। यह लालच ही है जो ट्रेडर को समय रहते मुनाफ़ा बुक नहीं करने देता, जोखिम को नज़रअंदाज़ करवा देता है और अंततः उसे भारी नुकसान की ओर धकेल देता है।

लालच

लालच – ट्रेडिंग का सबसे खतरनाक दुश्मन

ट्रेडिंग और निवेश की दुनिया जितनी रोमांचक लगती है, उतनी ही कठिन भी है। हर इंसान यहाँ आता है लाभ कमाने की उम्मीद लेकर, लेकिन सच्चाई यह है कि हर कोई सफल नहीं हो पाता। इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है – लालच

लालच वह मानसिक अवस्था है जो ट्रेडर को विवेकहीन बना देती है। जब व्यक्ति केवल “थोड़ा और” पाने की चाह में अंधा हो जाता है, तो उसकी सोचने-समझने की क्षमता धुंधली पड़ जाती है। मार्केट में नुकसान का सबसे बड़ा कारण ज्ञान की कमी नहीं, बल्कि लालच है।

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लाभ की भूख, नुकसान की जड़

हर ट्रेडर अपने पहले मुनाफ़े से ही उत्साहित हो जाता है। अगर 5% कमाया तो अगली बार 10% की चाह बढ़ती है, फिर 20% की। धीरे-धीरे यह चाहत इतनी गहरी हो जाती है कि ट्रेडर तय सीमा और रणनीति भूलकर केवल मुनाफ़े के पीछे भागने लगता है। यही चाहत अंततः उसकी मेहनत की कमाई को भी छीन लेती है।

याद रखिए – मार्केट कभी भी “गारंटी” नहीं देता। अगर आप सोचते हैं कि आज जो ट्रेंड है वही हमेशा चलेगा, तो यह सबसे बड़ी भूल है। लालच व्यक्ति को इस भूल की तरफ धकेल देता है और यही उसकी हार की शुरुआत होती है।

“थोड़ा और” की मानसिकता का जाल

मार्केट में बहुत से ट्रेडर अच्छे-ख़ासे मुनाफ़े के बावजूद पोज़िशन को बंद नहीं करते। क्यों? क्योंकि मन कहता है: “अभी तो शुरुआत है, थोड़ा और रुको, और कमाओ।”

लेकिन हकीकत यह है कि यही “थोड़ा और” अक्सर बड़ा नुकसान कराता है। जिस जगह मुनाफ़ा सुरक्षित किया जा सकता था, वहाँ ट्रेडर लोभ में फँसकर सब गँवा देता है। यही कारण है कि सफल ट्रेडर हमेशा कहते हैं – “Profit is not booked until it’s booked.”

लालच

इतिहास हमें क्या सिखाता है?

आर्थिक इतिहास गवाह है कि लालच ने बड़े से बड़े निवेशक को भी ध्वस्त किया है।

  • 2008 का वैश्विक आर्थिक संकट – जब हाउसिंग लोन से जुड़े डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स में “अनंत मुनाफ़े” का सपना दिखाया गया और पूरा वित्तीय तंत्र धराशायी हो गया।

  • डॉट कॉम बबल – जब इंटरनेट कंपनियों में निवेशकों का लालच चरम पर था और अंततः अरबों डॉलर स्वाहा हो गए।

  • शेयर घोटाले – चाहे हर्षद मेहता का मामला हो या सत्यम घोटाला, हर जगह लालच ही मूल कारण था।

इन घटनाओं से साफ है कि लालच किसी एक ट्रेडर या निवेशक का नहीं, बल्कि पूरे बाज़ार का दुश्मन है।

अनुशासन ही असली ताकत

अगर कोई पूछे कि सफल ट्रेडर और असफल ट्रेडर में सबसे बड़ा अंतर क्या है, तो जवाब है – अनुशासन
सफल ट्रेडर जानता है कि कब बाज़ार से बाहर निकलना है, कब स्टॉप-लॉस लगाना है और कब मुनाफ़ा बुक करना है। वह लालच में फँसकर अपनी रणनीति नहीं तोड़ता।

अनुशासन के तीन सरल मंत्र –

  1. हर ट्रेड से पहले स्टॉप-लॉस तय करें।

  2. मुनाफ़े के लक्ष्य को पहले से लिखें और उसी पर टिके रहें।

  3. भावनाओं को बाज़ार से दूर रखें।

जो ट्रेडर इन तीन नियमों को अपनाता है, वही लंबे समय तक टिक पाता है।

आत्ममंथन ज़रूरी है

हर ट्रेडर को अपने आप से यह सवाल पूछना चाहिए:

  • क्या मैं विश्लेषण और रणनीति के आधार पर ट्रेड कर रहा हूँ या केवल मुनाफ़े की चाह पर?

  • क्या मैंने जोखिम का आकलन किया है या सिर्फ़ चकाचौंध देख रहा हूँ?

  • क्या मेरा निर्णय शांत दिमाग का नतीजा है या लालच की पकड़ का?

इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि आप मार्केट में सफल होंगे या असफल।

लालच से लड़ाई ही असली जीत

लालच

बाज़ार अवसर देता है, लेकिन अवसर को पकड़ना और उसे सही समय पर छोड़ना ही कला है। लालच इंसान को इस कला से दूर कर देता है। याद रखिए –

  • मार्केट से मुनाफ़ा हर कोई कमा सकता है, लेकिन उसे सुरक्षित करना ही असली कला है।

  • अनुशासन और धैर्य, लालच पर नियंत्रण पाने के सबसे बड़े हथियार हैं।

  • अगर आप लालच को काबू कर पाए, तो कोई भी मार्केट आपको हरा नहीं सकता।

इसलिए, हर ट्रेडर को यह समझना होगा कि लालच केवल एक भाव नहीं, बल्कि एक ऐसा जाल है जो सफलता के रास्ते को रोक देता है। सच यही है – लालच हमेशा आपका सबसे बड़ा दुश्मन रहेगा।

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