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इंद्रधनुष

इंद्रधनुष: आकाश में कभी-कभी एक अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, आसमानी, और बैंगनी रंगों का एक विशालकाय वृत्ताकार वक्र। यह है इंद्रधनुष इसे सुरधनु, इंद्रायुध, शक्रचाप, सप्तवर्ण के नाम से भी जाना जाता है।। इंद्रधनुष प्रकृति का एक अद्भुत सौंदर्य है।

सप्तवर्ण कैसे बनता है?

इंद्रधनुष

सप्तवर्ण का निर्माण सूर्य के प्रकाश और पानी की बूंदों के मिलने से होता है। सूर्य का प्रकाश एक सफेद प्रकाश होता है, जो वास्तव में सात रंगों का मिश्रण होता है। जब सूर्य का प्रकाश पानी की बूंदों से होकर गुजरता है, तो वह इन रंगों में विभाजित हो जाता है। यह विभाजन प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन के कारण होता है।

प्रकाश का अपवर्तन तब होता है जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है। पानी की बूंदें एक पारदर्शी माध्यम हैं। जब सूर्य का प्रकाश पानी की बूंदों से होकर गुजरता है, तो वह बूंदों के भीतर झुक जाता है। इस झुकाव को अपवर्तन कहते हैं।

प्रकाश का परावर्तन तब होता है जब प्रकाश किसी सतह से टकराकर वापस लौट जाता है। पानी की बूंदों का आकार गोलाकार होता है। जब सूर्य का प्रकाश पानी की बूंदों से होकर गुजरता है, तो वह बूंदों के पीछे की सतह से परावर्तित होकर हमारी आंखों में आता है।

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सप्तवर्ण की स्थिति

इंद्रायुध हमेशा दर्शक की पीठ के पीछे सूर्य होने पर ही दिखाई देता है। इसका कारण यह है कि प्रकाश का अपवर्तन और परावर्तन तब होता है जब सूर्य का प्रकाश दर्शक की आंखों से होकर गुजरता है।

सुरधनु का वर्णक्रम

इंद्रधनुष में सात रंग होते हैं। इन रंगों को निम्नलिखित क्रम में रखा जाता है:

  • लाल
  • नारंगी
  • पीला
  • हरा
  • नीला
  • आसमानी
  • बैंगनी

इन रंगों को वर्णक्रम भी कहा जाता है। इंद्रधनुष में लाल रंग बाहरी भाग में होता है और बैंगनी रंग आंतरिक भाग में होता है। इसका कारण यह है कि लाल रंग का प्रकाश पानी की बूंदों से होकर गुजरते समय सबसे कम झुकता है और बैंगनी रंग का प्रकाश सबसे अधिक झुकता है।

इंद्रधनुष के प्रकार

इंद्रधनुष दो प्रकार के होते हैं:

  • प्राथमिक सप्तवर्ण
  • द्वितीयक सप्तवर्ण

प्राथमिक सप्तवर्ण वह इंद्रधनुष है जो सबसे आम है। इसमें सात रंग होते हैं। द्वितीयक इंद्रधनुष प्राथमिक इंद्रधनुष के पीछे दिखाई देता है। इसमें भी सात रंग होते हैं, लेकिन इनका क्रम प्राथमिक इंद्रधनुष से उल्टा होता है।

सप्तवर्ण का महत्व

इंद्रधनुष

इंद्रधनुष प्रकृति का एक अद्भुत सौंदर्य है। यह हमें प्रकृति की शक्ति और सुंदरता का एहसास कराता है। इंद्रायुध को कई संस्कृतियों में शुभ माना जाता है।

सप्तवर्ण एक शुभ संकेत माना जाता है। यह खुशी, समृद्धि, और अच्छे भाग्य का प्रतीक है। कई संस्कृतियों में इंद्रधनुष को एक पौराणिक देवता या देवी से जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, हिंदू धर्म में सुरधनु को इंद्र देवता का प्रतीक माना जाता है।

सप्तवर्ण एक मनमोहक दृश्य है। यह हमें प्रकृति की शक्ति और सुंदरता का एहसास कराता है।

इंद्रायुध के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • इंद्रायुध का वर्णक्रम सूर्य के प्रकाश के सात रंगों का मिश्रण है। ये रंग हैं: लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, आसमानी, और बैंगनी।
  • इंद्रायुध की वक्रता सूर्य की स्थिति पर निर्भर करती है। सूर्य जितना ऊंचा होगा, इंद्रधनुष उतना ही छोटा होगा।
  • इंद्रायुध की चौड़ाई सूर्य की ऊंचाई पर भी निर्भर करती है। सूर्य जितना ऊंचा होगा, सुरधनु उतना ही चौड़ा होगा।
  • इंद्रायुध की दूरी सूर्य की स्थिति पर भी निर्भर करती है। सूर्य जितना ऊंचा होगा, सुरधनु उतना ही दूर होगा।

सप्तवर्ण के बारे में कुछ पौराणिक कथाएं

  • हिंदू धर्म में, सुरधनु को इंद्र देवता का प्रतीक माना जाता है। इंद्र देवता स्वर्ग के राजा हैं।
  • यूनानी पौराणिक कथाओं में, इंद्रधनुष को इरिस देवी का प्रतीक माना जाता है। इरिस देवी स्वर्ग और पृथ्वी के बीच संदेशवाहक है।
  • चीनी पौराणिक कथाओं में, शक्रचाप को चाँद और सूर्य के बीच एक संतुलन के रूप में देखा जाता है।

इंद्रधनुष प्रकृति का एक अद्भुत सौंदर्य है। यह हमें प्रकृति की शक्ति और सुंदरता का एहसास कराता है। शक्रचाप को कई संस्कृतियों में शुभ माना जाता है। यह खुशी, समृद्धि, और अच्छे भाग्य का प्रतीक है।

the hind manch
Pradeep Saini
Editor at  |  + posts

प्रदीप कुमार सैनी

आप उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर के रहने वाले हैं। आपने कानपुर के C.S.G.M विश्विद्यालय से Biochemistry में Msc किया है। व GD verma IIT, JEE institute , Allen Plus Institute ,Pace IIT JEE Institute , Vedanta IIT JEE Istitute जैसे कोचिंग संस्थान में Chemistry Faculty के रूप में काम किए हैं।
आप  THE HIND MANCH में संपादक के रूप में जुड़े हैं।

By Pradeep Saini

प्रदीप कुमार सैनी

आप उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर के रहने वाले हैं। आपने कानपुर के C.S.G.M विश्विद्यालय से Biochemistry में Msc किया है। व GD verma IIT, JEE institute , Allen Plus Institute ,Pace IIT JEE Institute , Vedanta IIT JEE Istitute जैसे कोचिंग संस्थान में Chemistry Faculty के रूप में काम किए हैं। आप  THE HIND MANCH में संपादक के रूप में जुड़े हैं।

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