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मंगल ग्रह

ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्व: विवाह के सन्दर्भ में उक्त मेलापक विधि से वर एवं कन्या के गुणों का मिलान हो जाता है, परन्तु मेलापक दृष्टि से गुणों के अतिरिक्त वर एवं कन्या के जन्मांगों में मंगल का विचार प्रमुख विचार है। मंगल के विचार से ही स्पष्ट होता है कि वर या कन्या मंगली है अथवा नहीं? या वर और कन्या की जन्मांग मंगल दोष से प्रभावित है या नहीं?

विवाह के सन्दर्भ में मंगल दोष को बहुत सावधानी पूर्वक देखना चाहिए एवं साथ ही साथ मंगल दोष के परिहार पर भी ध्यान देना चाहिए। यद्यपि जन्मांग में मंगल दोष पर ज्यादा विवाद नहीं है परन्तु मंगल दोष के परिहार पर विवाद अधिक होने के कारण मंगल दोष के सन्दर्भ में किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह अवश्य लेकर ही मंगल दोष का निर्धारण करें। आज के लेख में हम आपको मंगल दोष व मंगल ग्रह परिहार की रीति समझाते हैं।

👉🏻आपकीं जन्म कुंडली के इन भावों में है मंगल तो आप है मांगलिक:–

मंगल ग्रह

●सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक है कि जन्म कुण्डली में किन-किन भावों को मंगल दोष कारक होने की संज्ञा दी गयी है। यदि जन्म कुण्डली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश भावों में से किसी भी भाव में स्थित हो तब कहा जायेगा कि जन्म कुण्डली में मंगल दोष विद्यमान है। दक्षिण भारत में तथा उत्तर भारत के कुछ विद्वान द्वितीय भाव को भी मंगल का दोष कारक भाव मानते हैं। अतः विवाह के सन्दर्भ में जिन भावों से मंगल का दोष माना जाता है उक्त चक्र निम्न प्रकार है।

√● उक्त मंगल की स्थिति लग्न के अनुसार है। इसी प्रकार जन्म कुण्डली में जहाँ चन्द्र स्थित हो उसको लग्न मानकर भी मंगल की स्थिति की विवेचना करनी चाहिए तथा इसी प्रकार जन्मांग में जहां शुक्र स्थित हो उसको लग्न मानकर यह देखना चाहिए कि मंगल उपरोक्त किन्हीं ६ भावों में तो स्थित नहीं है। तात्पर्य यह है कि मंगल दोष में लग्न, चन्द्र लग्न एवं शुक्र लग्न से यदि मंगल उपरोक्त वर्णित भावों में स्थित है तो वह जन्मांग मंगल दोष से युक्त मानी जायेगी।

👉🏻मंगल दोष परिहार’-

◆मंगल के उक्त वर्णित भावों में स्थित होने से वह जन्मांग मंगल दोष से प्रभावित मानी जाती है इसमें कोई सन्देह नहीं है, परन्तु मंगल दोष के परिहार के सम्बन्ध में विद्वानों के बीच मतभेद हैं। अतः मंगल दोष परिहार के लिये विद्वान ज्योतिषी की सलाह से ही उसका परिहार मानें। यहां पर मंगल दोष से सम्बन्धित परिहार के कुछ नियम बताते हैं परन्तु यह नियम अन्तिम नहीं है।

● यदि मंगल मेष राशि, कर्क राशि, वृश्चिक राशि, या मकर राशि में हो तथा मंगल चतुर्थ या सप्तम भाव पर लग्न से चन्द्र लग्न से या शुक्र लग्न से स्थित हो, तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

●यदि मंगल मेष, मिथुन, कन्या या वृश्चिक राशि में हो तथा मंगल द्वितीय भाव पर लग्न से चन्द्र लग्न से या शुक्र लग्न से स्थित हो, तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

●. यदि मंगल मेष, वृष, तुला या वृश्चिक राशि में हो तथा मंगल चतुर्थ भाव पर लग्न से चन्द्र लग्न से या शुक्र लग्न से स्थित हो, तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

● यदि मंगल मेष, कर्क, वृश्चिक या मकर राशि में हो तथा मंगल सप्तम भाव पर लग्न से चन्द्र लग्न से या शुक्र लग्न से स्थित हो, तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

●. यदि मंगल कर्क, धनु, मकर या मीन राशि में हो तथा मंगल अष्टम भाव पर लग्न से चन्द्र लग्न से या शुक्र लग्न से स्थित हो तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

● यदि मंगल वृष, मिथुन, कन्या या तुला राशि में हो तथा मंगल द्वादश भाव पर लग्न से चन्द्र लग्न से या शुक्र लग्न से स्थित हो तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

●. यदि वर एवं कन्या किसी एक के जन्मांग में मंगल प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो तथा दूसरे के जन्मांग में उक्त किसी भी भाव में शनि स्थित तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

●. सिंह लग्न और कर्क लग्न में यदि मंगल लग्न में स्थित हो तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

●. शनि यदि प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में एक के जन्मांग में हो और दूसरे के जन्मांग में उक्त भावों में से किसी एक भाव में मंगल हो तो मंगल दोष का परिहार हो जाता है।

● यदि राहु, मंगल या शनि जन्मांग के तृतीय, षष्ठ, या एकादश भावों में दूसरी कुण्डली में हो तो मंगल दोष नष्ट हो जाता है।

👉🏻मंगल के प्रकार..

●मौलिया मंगल:- जन्म कुण्डली के लग्न स्थान से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल हो तो ऐसी कुण्डली मंगलीक कहलाती है, परन्तु उपरोक्त स्थिति यदि पुरुष जन्मांग में हो तो वह जन्मांग मौलिया मंगल वाली कहलाती हैं।

●चुनरी मंगल:- यदि उपरोक्त भावों में मंगल किसी स्त्री के जन्मांग में हो तो वह जन्मांग चुनरी मंगल वाली कहलाती है।

 

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👉🏻मंगल ग्रह का धार्मिक व पौराणिक महत्व:-

हिन्दू धर्म के अनुसार मंगल ग्रह को मंगल देव का प्रतिनिधित्व माना जाता है, जो एक युद्ध के देवता है। संस्कृत में इन्हें भौम अर्थात भूमि का पुत्र कहा गया है। शास्त्रों में मंगल देव के स्वरूप का वर्णन करते हुए उनकी चार भुजाएँ बतायी गई हैं। वह अपने एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में गदा, तीसरे हाथ में कमल तथा चौथे हाथ में शूल लिए हुए हैं और भेड़ उनकी सवारी है। इसके साथ ही मंगल ग्रह का संबंध हनुमान जी भी है। मंगलवार के जातक हनुमान जी का व्रत धारण करते हैं। हनुमान जी अपने भक्तों की भूत-पिशाच से रक्षा करते हैं।

भले ही मंगल ग्रह को क्रूर ग्रह कहा जाता है। परंतु आप सोचिए, जिस ग्रह का नाम ही मंगल है वह किसी के लिए अमंगल कैसे हो सकता है। हम जानते हैं कि सभी ग्रह के नकारात्मक और सकारात्मक दोनों प्रभाव मनुष्य जीवन पर पड़ते हैं। उन नौ ग्रहों में मंगल ग्रह भी एक है।

स्टूडेंट कॉर्नर ,:–

●मंगल ग्रह को लाल ग्रह कहते हैं क्योंकि मंगल की मिट्टी के लौह खनिज में ज़ंग लगने की वजह से वातावरण और मिट्टी लाल दिखती है.।

●मंगल ग्रह के दो चंद्रमा हैं. इनके नाम फ़ोबोस और डेमोस हैं. फ़ोबोस डेमोस से थोड़ा बड़ा है. फ़ोबोस मंगल की सतह से सिर्फ़ 6 हज़ार किलोमीटर ऊपर परिक्रमा करता है।

●मंगल ग्रह का गुरुत्वाकर्षण धरती के गुरुत्वाकर्षण का एक तिहाई है. इसका मतलब ये है कि मंगल पर कोई चट्टान अगर गिरे तो वो धरती के मुकाबले बहुत धीमी रफ़्तार से गिरेगी।

👉🏻कुंडली में मंगल के शुभ और अशुभ होने के प्रभाव निम्न होते हैं:–

◆शुभ प्रभाव :

मंगल ग्रह सेनापति स्वभाव का है।

*शुभ हो तो साहसी, शस्त्रधारी व सैन्य अधिकारी बनता है या किसी कंपनी में लीडर या फिर श्रेष्ठ नेता।

*मंगल अच्छाई पर चलने वाला है ग्रह है किंतु मंगल को बुराई की ओर जाने की प्रेरणा मिलती है तो यह पीछे नहीं हटता और यही उसके अशुभ होने का कारण है।

*सूर्य और बुध मिलकर शुभ मंगल बन जाते हैं।

* दसवें भाव में मंगल ग्रह का होना अच्छा माना गया है।

● अशुभ प्रभाव :-

बहुत ज्यादा अशुभ हो तो बड़े भाई के नहीं होने की संभावना प्रबल मानी गई है।

*भाई हो तो उनसे दुश्मनी होती है।

*बच्चे पैदा करने में अड़चनें आती हैं।

*पैदा होते ही उनकी मौत हो जाती है।

*एक आंख से दिखना बंद हो सकता है।

*शरीर के जोड़ काम नहीं करते हैं।

*रक्त की कमी या अशुद्धि हो जाती है।

*मंगल के साथ केतु हो तो अशुभ हो जाता है।

*मंगल के साथ बुध के होने से भी अच्छा फल नहीं मिलता।

*चौथे और आठवें भाव में मंगल अशुभ माना गया है।

“किसी भी भाव में मंगल अकेला हो तो पिंजरे में बंद शेर की तरह है।

Lokendra Singh Tanwar
Auther at  |  + posts

लोकेन्द्र सिंह तंवर

आप मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा तहसील के रहने वाले हैं। आपने उज्जैन के विक्रम विश्विद्यालय से पत्रकारिता मास कम्युनिकेशन में एम.ए किया है। इससे पूर्व में नईदुनिया अखबार में एक वर्ष इंटरशिप किया है। जागरण,शिप्रा संदेश, दस्तक,अक्षर विश्व, हरिभूमि जैसे अखबारों में ऑथर के रूप में काम किया है। आप लोगो से मिलने ,उनके बारे में जानने, उनका साक्षात्कार करने उनके जीवन की सकारात्मक कहानी लिखने का शोक रखते हैं। साथ ही कुछ प्रोग्राम से जुड़ कर यूथ डेवलपमेंट व कम्यूनिटी डेवलोपमेन्ट पर भी काम कर रहे हैं।

आप  The Hind Manch में ऑथर के रूप में जुड़े हैं।

By Lokendra Singh Tanwar

लोकेन्द्र सिंह तंवर

आप मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा तहसील के रहने वाले हैं। आपने उज्जैन के विक्रम विश्विद्यालय से पत्रकारिता मास कम्युनिकेशन में एम.ए किया है। इससे पूर्व में नईदुनिया अखबार में एक वर्ष इंटरशिप किया है। जागरण,शिप्रा संदेश, दस्तक,अक्षर विश्व, हरिभूमि जैसे अखबारों में ऑथर के रूप में काम किया है। आप लोगो से मिलने ,उनके बारे में जानने, उनका साक्षात्कार करने उनके जीवन की सकारात्मक कहानी लिखने का शोक रखते हैं। साथ ही कुछ प्रोग्राम से जुड़ कर यूथ डेवलपमेंट व कम्यूनिटी डेवलोपमेन्ट पर भी काम कर रहे हैं। आप  The Hind Manch में ऑथर के रूप में जुड़े हैं।

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