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26/11 आतंकी हमलेप्रतीकात्मक चित्रण- होटल ताज और ओबेरॉय होटल

जानें 26/11 हमले ने पूरे देश को कैसे हिला के रख दिया था ? जिसके जख्म आज भी है ताजा !

मुम्बई इतिहास में 26/11 से 29/11 तक कि तारीख ब्लैक डे के नाम से जानी जाती है। मुम्बई हमले के 15 साल बीत जाने के बाद भी आज भी इस हमले को सोच कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इन तीन दिनों के अंदर पाकिस्तान से आए 10 आतंवादियों ने मुम्बई को छलनी कर दिया था। कुल 160 लोग की मौत हुई और 300 लोग से ज्यादा घायल हुए। उनकी बंदूक से निकली गोली मासूम और निर्दोष लोगों को अपना निशाना बना रही थी। आज इतने सालों के बाद भी मुंबई हमले के जख्म आज भी जिंदा है। इस हमले से मुंबई ही नहीं पूरे भारत को हिला कर रख दिया था। इस हमले का शिकार भारतीय ही नहीं विदेशी पर्यटक भी हुए थे। ये पर्यटक भारत में घूमने और छुट्टियां बिताने आए थे।

आतंकी हमले की कहानी सिलसिलेवार:

हर रोज की तरह 26 नवंबर को भी मुंबई अपने काम में लगी हुई थी। सब अपने काम-धाम की और निकल रहे थे या कुछ निकलने की तैयारी कर रहे थे। मुंबई को भनक तक नहीं थी, समुंदर के रास्ते 10 की संख्या में लड़के अपने साथ बर्बादी का सामान लेकर शहर में 23 नवंबर को ही पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान के कराची शहर से होते हुए ये जैश-ए-मोहम्मद के 10 आतंकी मुंबई में समुंदर के रास्ते दाखिल हो चुके थे। ये आतंकी जिस नाव से मुंबई तक पहुंचे थे, वो भी भारतीयों की थी। जिसे इन लोगों ने उनको मारकर ली थी। नाव के सहारे ये आतंकी मुंबई के कोलाबा इलाके में रात आठ बजे उतरे।

चार ग्रुप्स में बंटकर ये आतंकी टैक्सी के माध्यम से अपने टार्गेट्स की तरफ बढ़ने लगे। हैरान करने वाली बात है कि इन्हें देखकर पास के मछुआरों को इनपर शक भी हुआ और उन्होंने इसकी जानकारी नजदीकी पुलिस को दी थी, लेकिन उन पुलिसकर्मियों ने खास ध्यान नहीं दिया।

मुंबई के व्यस्तम रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी

26/11 आतंकी हमले: जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन पर रात 9.30 बजे सेंट्रल हाल में दो हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी है। इन दो आतंकियों में एक अजमल कसाब भी था, जिसे अब फांसी दी जा चुकी है। दोनों आतंकियों ने अपनी AK47 से मात्र 15 मिनट की गोलीबारी में 52 लोगों की जान ली और 100 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था।

आतंकियों की बंदूकें यहीं तक शांत नहीं रहने वाली थी। आज मुंबई की काली रात का सामना करना था। सीएसटी पर हमले अभी रुके भी नहीं थे, की सूचना मिली कि साउथ मुंबई के लियोपोल्ट कैफ़े पर भी हमले शुरू हो चुके हैं। मुंबई का ये कैफ़े नामचीन रेस्तरांओं की संख्या में आता है। इस हमले में कुल 10 लोग मारे गए, जिनमें कुछ विदेशी नागरिक शामिल थे। ये कैफ़े मुंबई का सबसे पुराना कैफे था, जिसकी स्थापना 1871 में हुई थी। आज भी उस हमले की गवाही इस कैफ़े की दीवारों पर लगी गोलियों के निशान देते हैं।

विले पारले इलाके में गोलीबारी

अब तक इन दो हमले ने मुंबई के लोगों और प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। लोगों में अफरा तफरी का माहौल बन चुका था। तभी देर रात 10.30 बजे सूचना मिली कि आतंकियों के तीसरे ग्रुप ने विले पारले इलाके में गोलीबारी करनी शुरू कर दी है। आतंकियों ने हमले में एक टैक्सी को उड़ा दिया, जिसमें एक यात्री और ड्राइवर की जान चली गई थी।

होटल ताज, ओबेरॉय होटल और नरीमन हाउस पर हमला

26/11 आतंकी हमले
26/11 आतंकी हमले के समय होटल ताज

26/11 आतंकी हमले: इन हमलों के बाद अभी मुंबई को तीसरा सबसे बड़ा हमला झेलना था। जो कि मुंबई की शान कहे जाने वाले ताज होटल पर होने वाला था। आतंकियों ने ताज, ओबेरॉय होटल और नरीमन हाउस को अपना निशाना बनाना शुरू किया। ताज पर जब हमला हुआ उस वक़्त होटल में 450 के करीब और ओबेरॉय में 380 के करीब मेहमान मौजूद थे। आतंकियों ने सबसे पहले इन होटलों में मौजूद विदेशी नागरिकों को अपना निशाना बनाया। उनकी गोलियों ने होटल स्टाफ, आम नागरिकों, बच्चों तक को अपना निशाना बनाया।

ये आतंकी मुंबई की उस पूरी रात मौत का तांडव करते रहे। पूरी मुंबई पुलिस और अन्य सुरक्षा बल की खुली चुनौती देते ये आतंकी शहर के नामचीन जगहों पर फैल गए थे। जब तक सुरक्षा बल इन हमलों के लिए आते, इन आतंकियों ने अपना काम लगभग पूरा कर लिया था। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ एनएसजी के कमांडो और रैपिड एक्शन फ़ोर्स के जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया था। सुरक्षा बलों ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए 10 में से 9 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया, एक बचे आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया। विजय सालस्कर, हेमंत करकरे, हेड कॉन्स्टेबल तुकाराम अंबोले, एनएसजी कमांडो संदीप उन्नीकृष्णन और अन्य सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर इस हमले पर काबू पाया।

इस तरह से 29 नवंबर को सुरक्षा बलों की शहादत और अदम्य साहस के कारण ये हमला रुका। सैकड़ों की संख्या में देशी विदेशी लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और लोग घायल हुए। आज भी जो लोग इस हमले से पीड़ित है वो उस दिन को याद करके सिहर उठते हैं।

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Rajesh Mishra
Writer at  |  + posts

राजेश मिश्रा

आप उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले हैं। आपने राजकीय पॉलीटेक्निक, लखनऊ से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। आप ऐतिहासिक जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने और लिखने का शौक रखते हैं।

आप  THE HIND MANCH में लेखक के रूप में जुड़े हैं।

By Rajesh Mishra

राजेश मिश्रा

आप उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले हैं। आपने राजकीय पॉलीटेक्निक, लखनऊ से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। आप ऐतिहासिक जगहों पर घूमना और उनके बारे में जानने और लिखने का शौक रखते हैं। आप  THE HIND MANCH में लेखक के रूप में जुड़े हैं।

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